MUSARRAT ALI 14 Dec 2025 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत Khamosh_Alfaz 10240 0 Hindi :: हिंदी
तेरे चेहरे सा चमक कहाँ उस चाँद में है, तुझसे रोशन है ये दुनिया, और रोशन वो चाँद है । तेरे जुल्फों सा अंधेरा ना घटा कि काली रात में है, तुझमें सिमटी है वो संध्या, और सिमटी वो सांझ है । तेरे पलकों सा सवेरा कहाँ बुलबुल की बात में है तुझसे चहेके है वो कोयल, और उसकी आवाज है । तुझसे संगेमर बदन ना नागन श्रृंगार में है, तुझसे बैरी अप्सरा और बैरी मुमताज है । तेरे हुस्न सा महक ना सुमन शबाब में है, लबों पे तेरे खिलती कलियाँ, हंसी में यूँ गुलाब है । .... अली मुसर्रत मिर्ज़ापुर