MUSARRAT ALI 09 Dec 2025 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत Khamosh_Alfaz 9020 0 Hindi :: हिंदी
तेरे अंजुमन में कैद है मेरी हर तमन्ना
मैं दिवाना तेरे गालियों का हूँ,
यूँ मुसाफ़िर ना समझना ।
बागो में घूमता फिरता मैं बनके अफ़साना
मैं भौरां उन कलियों का हूँ,
यूँ आबिर ना समझना ।
पड़ती जब शबनम की बूंदे मेरे जिस्मों जां पे
मैं सहमा तेरे प्यार में,
यूँ कातिल ना समझना ।
डुब जाती है जो कश्ती जब किसी दरिया में
मैं भंवरा हूँ लहर का,
यूँ साहिल ना समझना ।
उड़ने कि तौफिक़ मुझको दे मेरे परवरदिग़ार
मैं पंछी तेरे घर का हूँ,
यूँ काफ़िर ना समझना ।
... By Musarrat Ali Mirzapur