Naresh kumar 01 Dec 2025 ग़ज़ल दुःखद उम्मीद,लौ, हवा, तोहफा, अंधेरा, अफसोस, भरोसा, किस्मत, बिछड़ना, जिम्मेदारी, सपने 8772 0 Hindi :: हिंदी
उम्मीद की लौ, लड़खड़ा के जल रही हवा,सारी हमारे, खिलाफ चल रही है तोहफे थे जितने सारे,अंधेरो को मिल गये अफसोस,करके रोशनी,हाथ मल रही है बैठे ही रह गये हम, क्यों उसके भरोसे जो लड़ रहे थे उनकी, किस्मत बदल रही मुझसे बिछड़ रहे थे, दुनिया के लिए तुम मुझको तो लग रहा था,मेरी जां निकल रही है मैं, घर चलाने वाला ही,बनके रह गया हू मेरी जिम्मेदारी मेरे, सपने निगल रही है उसको भी मेरे साथ था, नुकसान होने वाला नेता की तरह वो भी,अब दल बदल रही है मेरी जेबों में तो, मेहनत की भी,टिकती नहीं मगर दुनिया को तो, हराम की भी फल रही है