Ritvik Singh 30 Mar 2023 ग़ज़ल दुःखद #yahoo #google #bing 39207 0 Hindi :: हिंदी
उसने हमसे इस कदर मुँह मोड़ा जैसे हमारी ज़िंदगी ख़राब है सो है उसके बिछड़ने के बाद यारो उस पानी के गिलास में शराब है सो है यारो मुझे कई राहगीरों ने रोका था दिल की बस्ती ख़राब है सो है हमने भी अपने तर्क दे दिए यूँ बोल के हम भी नवाब है सो है वो जो दिल के अंदर यूँ छिपा बैठा है टूटा ख़्वाब है सो है जो तुम अपनी नज़रो से हमें पिला रहे थे वो शराब है सो है बरसों पहले डेह गयी थी जो इमारत वो उसका मिहराब है सो है अब उसके हाथ में वो रुख़ तों ना है मगर अब भी वो गुलाब है सो है जिसे हम सूखा दरियाँ मानते थे वो अब सैलाब है सो है अब हमारे और उसके दरमियाँ एक तेजाब सा है सो है जो भी उस राह से निकलता रहा वो एक सवाब है सो है एक तरफ़ मेरी रुस्वाई है और एक तरफ़ उसके अधूरे ख़्वाब है सो है जो ग़ुस्से में आधी जला दी आधी फाड़ दी गयी वो हमारी किताब है सो है हमारी ज़िंदगी में कई हलचल है और वो इतना ला-जवाब है सो है :- ऋत्विक सिंह