मोती लाल साहु 27 Sep 2025 ग़ज़ल अन्य #ज़िंदगी #नश्वरता #हयात #वक़्त #आख़िरत#फ़ानी #मोह #दौलत #ग़ज़ल #motighazal 19609 1 5 Hindi :: हिंदी
भूल मेरी कि मैं यहांँ रहूंँगा बरकरार, ना कोई जीव और जगत रहेगी बरकरार। गुरुर-ए-दौलत-ओ-हिकमत किस पे कीजे, नज़र है वक्त की, सब कुछ रहेगा नादार। ख़याल-ए-ज़िंदगी था, कि सदा महफ़िल सजेग़ी, हयात-ए-फ़ानी का पल भर का है ये सिंगार। सोचा था, बारात सजेगी मैं दूल्हा बनूंँगा, पर आख़िरत की सजेगी, ये डोली सबकी यार। ये आरज़ू-ए-जहांँ सबको मोती ने बताई, की चलना है हमें सबको, ये कैसा है क़रार? -मोती
9 months ago