संदीप कुमार सिंह 28 Apr 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाजिक हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें तथा आनंद प्राप्त करेंगे। 27212 0 Hindi :: हिंदी
अच्छाई की भावना, लाती सदा बहार। बनते दूजे के लिए, अनुपम दिव्य विचार।। अनुपम दिव्य विचार,ज्ञान की ज्योति जलाती। घर घर हो उजियार,दुखों की छाँव भगाती।। कहते कवि संदीप,बने रक्षा की खाई। जीवन हो उद्धार,छोड़ कभी न अच्छाई।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....