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अपने पराये क्यों, लगने लगे हैं रिश्तों से अब हम, बिछड़ने लगे हैं .

Meena ahirwar 28 May 2024 गीत अन्य गीत... 42053 0 Hindi :: हिंदी

अपने पराये क्यों, लगने लगे हैं
 रिश्तों से अब हम, बिछड़ने लगे हैं . 

कल तलक जो साया बनकर ,साथ-साथ चलते 
आज है ख़फ़ा जैसे ,अंजान हो कोई हम. 
अपने पराये अब होने लगे हैं
रिश्तों से अब हम, बिछड़ने लगे हैं . 

अपने पराये क्यों, लगने लगे हैं
 रिश्तों से अब हम, बिछड़ने लगे हैं . 

कल तलक तो दूरी थी, पर सभी थे पास हम 
आज पास होकर भी, दूर है सभी हम
अपनों की डोर भी अब छूटने लगी है 
रिश्तों से अब हम, बिछड़ने लगे हैं .

 अपने पराये क्यों, लगने लगे हैं
 रिश्तों से अब हम, बिछड़ने लगे हैं . 

उद्देश- इस गीत में ये बताने का प्रयास किया गया हैं, की कितना ही गहरा रिश्ता हो वो  गलतफहमी के कारण धीरे- धीरे कमजोर पड़ने लगता हैं. इसीलिए रिश्तों को समझो क्युकी एक बार यदि किसी भी रिश्ते में दरार पड़ी वो फ़िर वैसा रिश्ता नहीं रहता... 

नाम- मीना अहिरवार, 
जिला- छतरपुर (म. प्र) .

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