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जो न महके वो सावन नहीं चाहिए,

Revati raman 22 Feb 2025 गीत प्यार-महोब्बत 32252 0 Hindi :: हिंदी

जो न महके वो सावन नहीं चाहिए,
तुम बिन कोई आँगन नहीं चाहिए।

धूप बिन कैसे चमकेगी रोशनी,
साँस बिन कैसी होगी ये ज़िंदग़ी,
बिन तेरे मन भी सूना रहेगा,
जैसे बाग़ों में पतझड़ सजेगा।

बिन प्रेम कोई स्पंदन नहीं चाहिए।

ख़्वाब जो देखे थे आँखों ने मिलकर,
क्यों वही टूट जाते हैं हर पल बिखर,
जो अधूरी रही वो कहानी नहीं,
अब उदासी भरी रात आनी नहीं।

अब विरह का कोई दर्पण नहीं चाहिए।

पास आओ कि दिल को सुकूँ मिल सके,
बात कह दो कि जज़्बात बहने लगे,
जो बने प्रेम का एक आशियाना,
वो हकीकत में हर पल सँवरने लगे।

अब कोई अधूरा बंधन नहीं चाहिए...

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