Santoshi devi 30 Mar 2023 गीत समाजिक माँ 129613 0 Hindi :: हिंदी
माँ तेरे आँचल की छाया,दुःख संताप हर लेती हैं बाल सुमन मन में सदा, स्नेह सुवास भर देती हैं। चमक नींद शरद रातों की, सूखे में मुझे सुलाती । सहलाकर अकड़े बदन को, चिंता सभी भुलाती । सींच रक्त का कतरा कतरा, रूप नया दे देती हैं माँ तेरे आँचल..................................... अंतस मर्म सहज ही, खुली किताब सी जाने। अक्षर बोध नही तुझको, भाव गूढ़ तो सब जाने। भांप जाती झट से चेहरा,सरपट दौड़ी आती हैं। माँ तेरे आँचल.......................... गोद तेरी जन्नत थी, मुख मलिनता नहीं आई। मेरी पीड़ा हरने को तू, आगे सदा ही आई। दूध से भीगे आँचल में,स्वप्न सुख के भर देती हैं। माँ तेरे आँचल........................…........ मुझे अखरती रही सदा, तेरी डांट की बंदिशे। आज समझ मे आया माँ, पूरी करती ख्वाहिशें। माँ सह जाती हर कष्ट, जब ममता हिलोरे भरती हैं। माँ तेरे आँचल................................. कहा कभी नादानी वश, परवाह न मेरी करती । शब्द ध्वनि आज यही, मेरी ही कृति से मिलती। संतान सुख की कल्पना में,हरदम माँ ठगी जाती हैं। माँ तेरे आँचल कीछाया, दुःख संताप हर लेती हैं। संतोषी देवी। शाहपुरा जयपुर राजस्थान।