Poonam Mishra 15 Jun 2023 गीत समाजिक कोई शाम तुम्हें भी आना चाहिए 60174 0 Hindi :: हिंदी
दिन ढलते ही मन की उम्मीदें भी! पता नहीं कहां छुप जाती हैं! शायद मन को बहलाने का! आंखों में आंसू ना आए ! इसको छिपाने का प्रयत्न करने लगती हैं ! शाम होते ही यह मन तन्हाई से रूबरू क्यों होता है? आप से बिछड़े कई वर्ष हो गए हैं । फिर भी इन तन्हाइयों में आपको याद क्यों करता है ? दिल यह कहता है । मुझे इन तन्हाइयों से छुटकारा चाहिए। कोई शाम तुम्हें मेरे घर भी आना चाहिए चर्चित लेखिका पूनम मिश्रा