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नकाब खुशियों का चेहरों पर लगाई

Jyoti yadav 17 Sep 2023 गीत समाजिक नकाब खुशियों का चेहरों पर लगाई 31004 0 Hindi :: हिंदी

नकाब खुशियों का चेहरों पर लगाई
हर ग़म दर्द खुद ही खुद से छुपाई
 जन्नत की चाहत में धरती तक आई
पर अफसोस यहां तो जहन्नुम ही पाई है
😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭
अब ना ख्वाहिश रही हंसने की
ना लालसा कुछ पाने की 
एक फर्ज मिला है हमको
बारी है उसे निभाने की
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
अंधेरी काली रात हो या 
खुबसूरत सवेरा अपना क्या
इन होंठों पर मुस्कान और
मन में दुखों का डेरा
🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗
मुट्ठी बांधे आई थी 
हाथ पसारे चली जाऊंगी
मैं बेटी हूं ना 
बस इतनी ही मेरी कमाई थी 
🫀🫀🫀🫀🫀🫀🫀🫀🫀
ना जाने कब तक चलेगा
 यह खेल अनोखा
क्या देखने आई थी 
और क्या देखा
💯💯💯💯💯💯💯💯

सांसें तो चलती है 
पर जिंदगी अधुरी है
ख्वाहिश तो सबने पाल रखी
 पर कहां किसी की पुरी है 
♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️
कब तक यूं ही चलता
 रहेगा यह सिलसिला
बंद कर दें यह खेल खुदा
 मंजरी बहुत तूने दिखाई
नकाब खुशियों का चेहरों पर लगाई
 हर ग़म दर्द खुद ही खुद से छुपाई
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

ज्योति यादव के कलम से ✍️
कोटिसा विक्रमपुर सैदपुर गाजीपुर 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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