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ये दरिया कल-कल बहती....

मोती लाल साहु 30 Mar 2023 गीत समाजिक ये दरिया कल-कल बहती। 29841 0 Hindi :: हिंदी

ये दरिया कल-कल बहती!

बादलों से झरते,
रिमझिम फुहारें।
दिल के साज छेड़ती,
ये दरिया कल-कल बहती।।

ये मौसम बहारों का,
और ये फिजाएं।
पहाड़ों को चूमती,
ये दरिया कल-कल बहती।।

इन वादियों में ये खेलती,
कोई गीत-गाती।
दिल में उतरती,
ये दरिया कल-कल बहती।।
-मोती

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