Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

चाहत किस-की गुस्सा और चाहत की कोई सीमा नहीं

DINESH KUMAR KEER 09 Jan 2024 कहानियाँ अन्य 53713 0 Hindi :: हिंदी

चाहत किस-की...? 

एक समय की बात है, एक व्यक्ति अपनी हाल ही में एक कार खरीदी वो उस को बड़ी चाहत से धुलाई करके चमका रहा था। उसी समय उसका पांच वर्षीय लाडला बेटा, किसी नुकीली चीज से कार पर कुछ लिखने लगा। कार पर खरोंच लगती देखकर पिता को इतना गुस्सा आया कि वह बेटे का हाथ जोर से मरोड़ देता है। इतना जोर से कि बेटे की उंगलियां मुड़ सी जाती हैं। बाद में चिकित्सालय में पीड़ा से कराह रहा बेटा पूछता है- पापाजी, मेरी उंगलियां कब तक अच्छी हो जायेगी ? शर्मीन्दगी पर पछतावा कर रहा पिता कोई उत्तर नहीं दे पाता। वह वापस जाता है और कार पर लातें मार कर अपना गुस्सा निकालता है। कुछ समय के बाद उसकी नजर उसी खरोंच पर पड़ती है, जिसके कारण से उसने, अपने बेटे का हाथ मरोड़ा था। बेटे ने नुकीली वस्तु से लिखा था- मेरे प्यारे पापाजी।

सीख : गुस्सा और चाहत की कोई सीमा नहीं होती। याद रखें कि वस्तुऐं, उपयोग के लिए होती हैं और इंसान चाहत के लिए। परन्तु होता इससे विपरीत है। लोग वस्तुओं को चाहते है और लोगों का उपयोग करते हैं।

-दिनेश कुमार कीर

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

बहुत समय पहले की बात है रहमान चाचा के यहाँ एक चूहा रहता था. हर दिन की तरह उस दिन भी बाज़ार से गाँव लौटते वक़्त चाचा झोले में कुछ सामान लेकर � read more >>
सच्चे भाई सुबह की योगा क्लास लेने के बाद मैं पार्क से होते हुए बाजार वाली रोड पर सैर के लिए निकल पड़ी । सुबह के व� read more >>
लड़का: शुक्र है भगवान का इस दिन का तो मे कब से इंतजार कर रहा था। लड़की : तो अब मे जाऊ? लड़का : नही बिल्कुल नही। लड़की : क्या तुम मुझस read more >>
Join Us: