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चौकीदारी का महत्व

राकेश 21 May 2023 कहानियाँ अन्य शरारती बंदर, गीदड़ गधे भैया, बड़ों से बच्चों को सुरक्षा 31748 0 Hindi :: हिंदी

उत्तराखंड के घने जंगलों में एक शरारती बंदर का बच्चा रहता था।

वह रोज अपनी शरारत से नए-नए खतरनाक खेल खेल कर अपनी जान खतरे में डालता रहता था।

उस घने जंगल में गीदड़ और गधा उस शरारती बंदर के बच्चे का बहुत ख्याल रखते थे।

बंदर का बच्चा शरारती होने के साथ-साथ चुलबुला और सब से प्यार करने वाला था। इसलिए गीदड़ और गधा उससे बहुत प्यार करते थे।

गीदड़ और गधा जंगल में अपना पेट भरते हुए उस शरारती बंदर के बच्चे की चौकीदारी भी करते रहते थे। परंतु उस शरारती बंदर के बच्चे को गीदड़ और गधे की अपने ऊपर चौकीदारी बिल्कुल भी पसंद नहीं थी।

इसलिए वह अपनी शरारतों से गधे गीदड़ की जान भी मुसीबत में फंसा देता था, ताकि वह दोनों तंग आकर उसकी चौकीदारी करना छोड़ दें।

लेकिन ऐसी सारी समस्याओं को बर्दाश्त करने के बाद भी गीदड़ और गधा उस शरारती बंदर के बच्चे का ख्याल रखना नहीं छोड़ते थे।

एक तो वह उसे अपने बच्चे जैसा प्यार करते थे और दूसरा वह बंदर का शरारती बच्चा भी उनसे बहुत प्यार करता था।

एक दिन शरारती बंदर का बच्चा कांटो वाली झाड़ियों में घुस जाता है।

उस बंदर के बच्चे को नुकीले कांटो वाली झाड़ी में फंसा देखकर गीदड़ गधा दोनों उसे जल्दी से भागकर उस नुकीले कांटो वाली झाड़ी से बाहर निकालने जाते हैं। लेकिन उसको निकालते निकालते वह दोनों खुद उस नुकीले कांटो से भरी झाड़ी में फंस जाते हैं।

लेकिन वह शरारती बंदर का बच्चा इन दोनों को फसाने के लिए उस नुकीली कांटो वाली झाड़ी में खुद फसा था क्योंकि वह गीदड़ और बंदर को उस नुकीले कांटो वाली झाड़ी में फसाना चाहता था।

वह बंदर का बच्चा आसानी से उस नुकीले कांटो वाली झाड़ी से बाहर आकर ताली बजा बजाकर खूब हंसता है कि मैंने आज गधे गीदड़ भैया को बुरा फंसा दिया है।

कांटो से भरी झाड़ी में फसने के बाद गधे और गीदड़ के पूरे शरीर में नुकीले कांटे घुसने लगते हैं, और वह दोनों दर्द से तड़पने लगते हैं।

उसी समय जंगल के दूसरे बड़े जंगली जानवर वहां आकर गधे गीदड़ को उस नुकीली कांटो वाली झाड़ी से सुरक्षित निकाल लेते हैं।

उस दिन जीवन में पहली बार गधा और गीदड़ उस शरारती बंदर के बच्चे पर बहुत गुस्सा होते हैं। 

पहली बार गधे और गीदड़ को अपने ऊपर इतना गुस्सा करने की वजह से वह शरारती बंदर का बच्चा उनसे नाराज होकर ऊंचे पेड़ पर चढ़कर उसकी मोटी डाली पर सो जाता है।

दूसरे दिन रोज की तरह गधा और गीदड़ उस शरारती बंदर के बच्चे की हमेशा की तरह चौकीदारी करते हैं परंतु वह बंदर का बच्चा उनसे अब तक नाराज था। इसलिए वह उन्हें चकमा देकर जंगल से बाहर सड़क पर आजादी से खेलने लगता है। 

उसी समय उस सड़क से फलों से भरा एक ट्रक गुजरता है। 

और वह शरारती बंदर का बच्चा फल खाने के लालच में उस फल से भरे ट्रक के पीछे लटक जाता है।

और उस फल से भरे ट्रक का ड्राइवर अपना ट्रक सीधे फल मंडी पर ही रोकता है।

शहर की फल मंडी में अकेला फसने के बाद बंदर के शरारती बच्चे को गधे गीदड़ भैया और अपने खूबसूरत जंगल की बहुत याद आती है।

बंदर का शरारती बच्चा फल के ट्रक की छत से नीचे उतर कर जितनी बार भी अपने जंगल की तरफ जाने की कोशिश करता था, तो उस पर जंगली आवारा कुत्ते बुरी तरह हमला कर देते थे।

बंदर का शरारती बच्चा उस फल के ट्रक की छत पर पूरी रात फंसा रहता है और बार-बार यही सोचता है कि समझदार और बड़े बच्चों को सुरक्षा देने के लिए उनकी चौकीदारी करते हैं। उनके इस कार्य में बच्चों का भला ही होता है।

इसलिए उस दिन बंदर के बच्चे को बड़ों की चौकीदारी का महत्व समझ में आ जाता है। 

और दूसरे दिन वह किसी तरह जंगली कुत्तों से छुपते छुपाते अपने जंगल गधे गीदड़ भैया के पास पहुंच जाता है।

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