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गुस्ताख़ मोहब्बत, भाग 002

AJAY ANAND 05 Jul 2023 कहानियाँ प्यार-महोब्बत मोहब्बत, प्रेम रोग, नफरत, दुःख, रोमांस, रोमांटिक, 22632 0 Hindi :: हिंदी

गुस्ताख़ मोहब्बत ( भाग - 002 )
_________________😞

वो अक्सर मेरे घर आ जाया करती थी और मैं उसके आने का बेसब्री से इंतजार करता। सबसे नजरें बचाकर मैं उसे बार-बार देखा करता । 


जब वो किसी दिन मेरे यहां नहीं आ पाती तो मैं किसी बहाने उसी के यहां मिलने के लिए चले जाते।


उसे जब भी मैं देखता मन करता उसे अपने बाहों में भर लुं ।


जवानी के दहलीज पर कदम रखने वाले सभी लड़कों में सेक्स के लिए कुछ ज्यादा ही उतावले होते हैं।


उसे भी इस बात का अंदाजा लगने लगा कि मैं उसे पसंद करने लगा हूं।


पहले तो वह हमें नजरअंदाज करती रही लेकिन तिरछी नजर से देखा करतीं। उसे जल्द ही इस बात का एहसास होने लगा था कि मैं उसे पसन्द करने लगा हूं। और धीरे-धीरे उसे भी मुझसे प्यार होने लगा था।


मेरे इर्द-गिर्द इस तरह घुमती मानों मुझे रिझाने की कोशिश कर रही हो।

जैसे कह रही हो मैं भी आपको पसंद करने लगी हुं।

धीरे धीरे हम दोनों के बीच मिलना जुलना भी शुरू हो गया । वो हमें कहती - हम दोनों का मिलना जुलना सही नहीं है । किसी को मालूम चल गया तो क्या सोचेंगे मेरे बारे में।


मैं उसे अपने बाहों में भर कर कहता - जब मैं तुम्हारे साथ हूं तो डर कैसा ?????


आप तो यूं ही बोलते हैं जब मुसीबत आएगी तो आप पीछे भाग जाएंगे, अकेले छोड़ कर। सारी मुसीबत मुझे झेलनी पड़ेगी।



उसकी एक सास थी जो एक कोने में छोटे से खाट पर लेटे हुए रहती थी , इसी का फायदा हम दोनों उठाते।

जब कभी मिलने का मन करता ..... रातों में  टॉर्च की रोशनी देकर हमें बुलाती  और मैं बिना जमाने की परवाह किए बगैर उससे मिलने निकल पड़ता।


वक्त बीतता गया और हम दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गई। उसके पति कई बार आए और चले भी गए ....। 

कभी कभी किसी दोस्त से सुनने को मिलता था कि हम दोनों के बारे में कुछ अफवाह उड़ रही है लेकिन मैं इन सब बातों को नजर अंदाज कर दिया करते थे। 


क्यों कि उसके प्यार में पागल मैं इतना हो गया था कि प्यार में बदनामी होना मंजूर था लेकिन उससे दूर रहना नामंजूर।


कोई भी गलत काम चोरी छिपे कर रहे है तो उसका भंडाफोड़ होने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। ऐसा ही हुआ, वह समय आ ही गया जब सबकी जुबान पर हमारे प्यार के किस्से सुनने को मिलने लगे।


चाहे कुछ भी, हमें एक साथ रहना है हम दोनों ने यह तय कर लिया।


बस क्या था, भागने की प्लैनिंग  होने लगी। यह डिसाइड भी कर लिया कब और कितने बजे।

अब मैं मन ही मन खुश हो रहा था कि मुझे किसी का मज़ाक नहीं बनना पड़ेगा। मेरी अलग दुनिया होगी और वही मेरा संसार।

लेकिन होनी को कौन रोक सकता है जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था। उसके पति अचानक आ धमके और सारी बातें उसे मालूम हो गई, बस क्या था । मेरे घरवालों को पूरा का पूरा रामायण समाज के मंथाराऔ ने कह डाली। 

क्रमशः आगे.......????

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