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हाजिर जवाब

virendra kumar dewangan 30 Mar 2023 कहानियाँ अन्य short Story 123115 0 Hindi :: हिंदी

हाजिर जवाब
एक आफिस में एकाएक एक बड़े अफसर का निरीक्षण हुआ। 
वह छोटे अफसर के सिर पर सवार होकर प्रश्नों की झड़ी सहसा लगाने लगा। 
इससे छोटा अफसर तिलमिला उठा। छोटा अफसर, बड़े अफसर को खुश करने के वास्ते कालबेल बजाया। 
संयोग देखिए, उस वक्त आफीस में एक भी चपरासी नहीं था। दोनों के दोनों बाहर गए हुए थे। 
एक चेक जमा करने के लिए बैंक गया था, तो दूसरा फोटो कापी करवाने के लिए बाजार।
चपरासियों की गैर-माजूदगी से छोटे अफसर की धीरता टूट गई। 
वह अधीर होकर बड़बड़ाया ‘‘स्साले  मर गए सब।’’ 
...और वह केबिन से बाहर आकर चपरासियों पर नजर दौड़ाने लगा कि कोई कहीं बैठकर गप्पे तो नहीं हांक रहा है।
सहसा उसे राकेश आता हुआ दिखाई दे गया, जो खाली हाथ हिलाते हुए चला आ रहा था। 
साहब को बेचैन देखा, तो वह पलभर में साहब के सामने आकर खड़ा हो गया।
साहब गुस्से से बोले, ‘‘मैं पागलों की तरह धंटी बजा रहा हूॅं और तुम घूम रहे हो।’’
राकेश मुंहफट व साहब का मुंहलगा था। 
उससे बर्दाश्त नहीं हुआ कि साहब उन्हें यूं फटकारें, सो तत्काल जवाब दिया, ‘‘आपलोग काम में भी भेजते हो। गुस्सा भी दिखाते हो।’’
यह सुन साहब को याद आया कि उन्होंने ही इसे बैंक भेजा था। यह ठीक बोल रहा है। 
साहब सुनी-अनसुनी करता हुआ बोला, ‘‘ठीक है...ठीक है। बकबक मत कर। जा दो प्लेट खारा, दो प्लेट मीठा और बढ़िया-सा पान बनाकर ले ला।’’
...और चपरासी उल्टे पांव चल पड़ा।
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अनुरोध है कि लेखक के द्वारा वृहद पाकेट नावेल ‘पंचायतः एक प्राथमिक पाठशाला’ लिखा जा रहा है, जिसको गूगल क्रोम, प्ले स्टोर के माध्यम से writer.pocketnovel.com पर  ‘‘पंचायतः एक प्राथमिक पाठशाला veerendra kumar dewangan से सर्च कर और पाकेट नावेल के चेप्टरों को प्रतिदिन पढ़कर उपन्यास का आनंद उठाया जा सकता है तथा लाईक, कमेंट व शेयर किया जा सकता है। आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
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