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*प्रेरणास्पद कहानी..✍🏻* *काबिलियत की पहचान..* 💐सपनों का सौदागर.......करण सिंह💐

Karan Singh 30 Mar 2023 कहानियाँ समाजिक Ram/जय श्री राम/धार्मिक महत्व/सपनों का सौदागर.... करण सिंह/ Karan Singh/google/सनातन धर्म/स्टोरी/shayari/शायरी/संत रविदास/Ram/जय श्री राम/धार्मिक महत्व/सपनों का सौदागर.... करण सिंह/ Karan Singh/google/सनातन धर्म/स्टोरी/shayari/शायरी/संत रविदास/*🌳🦚प्रेरक कहानी🦚🌳* *💐जमी हुई नदी💐* 👌सपनों का सौदागर....करण सिंह👌/जमी हुई नदी/*प्रेरक कहानी* 👇👇👇 *"पडोसी......* 💐प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर..... करण सिंह💐/पड़ोसी/*🌳🦚प्रेरक कहानी🦚🌳* *💐💐अनोखी साइकिल रेस💐💐* #प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर......करण सिंह#/अनोखी साइकिल रेस/*प्रेरणास्पद कहानी..✍🏻* *काबिलियत की पहचान..* 💐सपनों का सौदागर.......करण सिंह💐/काबिलियत की पहचान/ 35894 0 Hindi :: हिंदी

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*प्रेरणास्पद कहानी..✍🏻*
   *काबिलियत की पहचान..*
💐सपनों का सौदागर.......करण सिंह💐
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*उपरमालिया के जंगल में एक  बहुत बड़ा तालाब था,* तालाब के पास एक *बगीचा था, जिसमे  अनेक प्रकार के पेड़ पौधे लगे थे।* दूर- दूर से लोग वहाँ आते और बागीचे की तारीफ करते।

गुलाब के पेड़ पे लगा पत्ता *हर रोज लोगों को आते-जाते और फूलों की तारीफ करते देखता,* उसे लगता की हो सकता है *एक दिन कोई  उसकी भी तारीफ करे,* पर जब काफी दिन बीत जाने के बाद भी किसी ने उसकी तारीफ नहीं की *तो वो काफी हीन महसूस करने लगा।* उसके अन्दर तरह -तरह के विचार आने लगे—” *सभी लोग गुलाब और अन्य फूलों की तारीफ करते नहीं थकते  पर मुझे कोई देखता तक नहीं , शायद  मेरा जीवन किसी काम का नहीं …कहाँ ये खूबसूरत फूल और कहाँ मैं… ”* और ऐसे विचार सोच कर वो पत्ता काफी उदास रहने लगा।


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*प्रेरणास्पद कहानी..✍🏻*
   *काबिलियत की पहचान..*
💐सपनों का सौदागर.......करण सिंह💐
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दिन यूँही बीत रहे थे कि *एक दिन जंगल में बड़ी जोर-जोर से हवा चलने लगी* और देखते-देखते उसने आंधी का रूप ले लिया।बगीचे के पेड़-पौधे तहस-नहस होने लगे, *देखते-देखते सभी फूल ज़मीन पर गिर कर निढाल हो गए,* पत्ता भी अपनी शाखा से अलग हो गया और *उड़ते-उड़ते तालाब में जा गिरा।*

पत्ते ने देखा कि  उससे कुछ ही दूर पर *कहीं से एक चींटी हवा के झोंको की वजह से तालाब में आ गिरी थी* और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी।

*चींटी प्रयास करते-करते काफी  थक चुकी थी* और उसे अपनी *मृत्यु तय लग रही थी* कि तभी पत्ते ने उसे आवाज़ दी, *”घबराओ नहीं, आओ, मैं तुम्हारी मदद कर  देता हूँ ”,* और ऐसा कहते हुए अपनी उपर बैठा लिया। *आंधी रुकते-रुकते पत्ता तालाब के एक छोर पर पहुँच गया।*


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   *काबिलियत की पहचान..*
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चींटी किनारे पर पहुँच कर बहुत खुश हो गयी और  बोली, *"आपने आज मेरी जान बचा कर बहुत बड़ा उपकार किया है, सचमुच आप महान हैं, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !"*

यह सुनकर पत्ता भावुक हो गया और बोला,*” धन्यवाद तो मुझे  करना चाहिए, क्योंकि तुम्हारी वजह से आज पहली बार मेरा सामना मेरी काबिलियत से हुआ, जिससे मैं आज तक अनजान था।* आज पहली बार मैंने अपने  जीवन के मकसद और अपनी  ताकत को पहचान पाया हूँ।
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*शिक्षा:-* 

मित्रों, *ईश्वर*  ने हम सभी को *अनोखी शक्तियां दी हैं;* कई बार हम *खुद अपनी काबिलियत से अनजान होते हैं* और समय आने पर हमें इसका पता चलता है, *हमें इस बात को समझना चाहिए कि   किसी एक काम में असफल  होने का मतलब हमेशा के लिए अयोग्य होना नही है।* खुद की काबिलियत को  पहचान कर आप वह काम कर सकते हैं, *जो आज तक  किसी ने नही किया है !*

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