मोती लाल साहु 08 Apr 2023 कहानियाँ समाजिक कहानी हम इंसानों की, हम आए हैं लाए हैं ना लेकर जाएंगे। हवा से भरी गुब्बारे की तरह पल दो पल के लिए यह जीवन है, इन आती-जाती सांसों की घड़ी के आधार पर यह चलती है। 26612 0 Hindi :: हिंदी
ये धरती ये गगन- अनवरत चलते रहेंगे इन बहारों में- हम खो जाएंगे, ये मौसम बदलते रहेंगे हम आए हैं- लाए हैं ना लेकर जाएंगे हम चिंतन जो- करते हैं भविष्य की, रोते-धोते हैं भुतकल की वर्तमान में- मेरा ये जीवन, एक-एक-सांसों की घड़ी के आधार पर आती-जाती चलती है हम हैं हवा से भरी- एक गुब्बारे की तरह, पल दो पल के लिए हम- इंसानों की यही कहानी है! -मोती