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कल्याणी ( एक अनोखी प्रेम कहानी){ सस्पेंस बरकरार}भाग 002

AJAY ANAND 24 Jun 2024 कहानियाँ प्यार-महोब्बत प्रेम, नफरत, रोमांस, रोमांटिक, कॉमेडी,एहसास, 69796 0 Hindi :: हिंदी

कल्याणी (एक अनोखी प्रेम कहानी) {सस्पेंस बरकरार} भाग- 002

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रोहिणी दवाई के थैले की ओर देखा और उसने अफसोस जताते हुए कहा - समझतीं हूं मैं , तुम कितनी बड़ी जिम्मेदारी लेकर गुजर रही हो। 
अब छोड़ो भी मां.....! रहने भी दो। बहुत हो चुका, अब नहीं। देख लेना एक दिन मैं ही घर छोड़कर भाग जाउंगी। रोज - रोज के झंझटों से तो बची रहुंगी।

थोड़ी देर बाद कल्याणी वापस भी आ जाती है। रोहिणी उसे देखकर मुस्काती है....
चल अब गुस्सा भी छोड़ दें... दोनों कॉलेज से आते ही होंगे... दोपहर के लिए खाना बना लें। नहीं तो चिल्लाएंगे।
कल्याणी खाना बनाने चली गई। डिब्बे खोलकर देखती है कुछ खाली पड़े हैं तो कुछ में थोड़ा बचा हुआ है।
चलो आज इससे ही किसी तरह काम चला लेती हूं। शाम में देखा जाएगा। दुकानदार को उधार भी तो देना हैं।
वह डिब्बे से पैसे निकाल कर गिनने लगती है।
इतने में किया होगा। उधारी भी नहीं चुकेगी। आज जो लुंगी सो वो अलग ही। लगता है रात में भुखे सोना पड़ेगा। मैं तो सो जाऊंगी पर ये सब.....! चलो शाम में देखा जाएगा अभी इसी से काम चला लेती हूं।
रोहिणी अपने अतीत की गहराई में जाने की कोशिश करती है कि कैसे उसके ईमानदार पति नागेश्वर दत्त लोगों की भलाई करते - करते खुद बेइमान हो गया और अपना दिमागी संतुलन खो दिया। शराब ने उसकी ही नहीं पूरे परिवार की जिंदगी बर्बाद कर दी।
घर आया था नागेश्वर का छोटा भाई और साथ में उसकी पत्नी और एक साल का छोटा बच्चा। एक सहारे के लिए...!!
कौन जानता था कि यह समय उसके लिए काल बनकर आएगा। रोहिणी की ममता जाग चुकी थी , उस छोटे बच्चे को देखकर। नागेश्वर के मना करने के बाद भी रोहिणी उसे अपने घर में शरण दिया।
सब कुछ अच्छा चल रहा था कि अचानक पुलिस आई और नागेश्वर के छोटे भाई ब्रह्मशंकर को थाने ले गई।
उसके बाद तो सब कुछ ही बदलते चला गया।
दरवाजे पर आवाज आते ही रोहिणी अपने अतीत से वापस आ जाती है।
कल्याणी बिछावन पर थोड़ा आराम करने के लिए लेटी ही थी कि फिर से बाहर दरवाजे पर आहट ने उसे जगा दिया था।
अब कौन आ गया, जरा सा चैन भी नहीं लेने देते, ये लोग। 
अपने भाई-बहन को देखते ही फिर वह बिछावन पर फिर से लेट गई।
उसकी बहन ज्योति सबसे पहले किचन की ओर चली गई। यह देखने कि खाने में क्या बना हुआ है।
क्या दीदी रोज रोज एक ही तरह खाना बनाती हो। खाते खाते मैं तो बोर हो गई हुं। कुछ नया क्यों नहीं बनाती हों।
कल्याणी कोई जबाब नहीं दिया तो उसने समझ लिया कि ज्यादा बोली तो गुस्सा हो जाएगी।
ज्योति उसके करीब जाकर बैठ जाती है।
जानती हो दीदी... विनोद आज फिर तुम्हारे बारे में पूछ रहा था। कहीं तुमसे वह प्रेम तो नहीं करने लगा है।
ऐसा क्यों, क्या देखा है उसने.. हमसे ज्यादा तो तुम ही अच्छी दिखती हो। हो सकता है मेरे बहाने तुमसे मिलता हो।
कल्याणी भी मजाक करते हुए कहा।
ऐसा नहीं है दीदी.....! हमसे प्रेम करता तो कभी ना कभी हमें पता चलता ना....! और वैसे भी मेरी उम्र प्रेम करने की नहीं है दो साल तक रुक जाती हूं। कोई ढंग का लड़का मिलें तो बताऊंगी।
तुम्हें पता है ना... मेरा तलाक होने वाला है। उसे तो यह भी पता है कि मेरी शादी पहले ही हो चुकी है। कल्याणी बिना संकोच के ही बोल दिया था।
हां तो , यही बात तो उसे भी मालूम है। जरा सोचो तुम, अगर तुम्हारी शादी टिल्लू शराबी से नहीं होता तो क्या तुम बिनोद से शादी नहीं करती। तुम भी तो तैयार थी ना शादी के लिए..! 
वो सब बहुत पहले की बात है, अब भला बिनोद जैसा लड़का सेकेण्ड क्लास की मॉडल को घर क्यों लाए।
ज्योति मुस्कुराते हुए कहा - मैं समझ रही हूं तुम अब भी उससे प्रेम करती है और वह भी तुमसे ज्यादा। वह तुमसे मिलकर बताना चाहता है लेकिन किसी बात से उसे डर लगता है। सच बोलूं तो मैंने उसकी आंखों में देखा है। तुम अब भी उससे प्रेम करती हो.. बस बताना नहीं चाहती। तुम कहो तो बात फाइनल करूं। मिलने का जगह मैं फिक्स करती हूं।
मिलने की जगह तुम फिक्स करोगी। वह तो हमें मिलता ही रहता है और दूर से ही देखकर वापस लौट जाता है। शायद पहले जैसा हिम्मत नहीं रहा अब उसमें। मर जाएंगे पर तुम्हें किसी का होने नहीं देंगे। साथ जिएंगे साथ मरेंगे। सब वादें झूठे..! कल्याणी कहते चली गई।
तुम्हें पता है या भुला गई दीदी.. टिल्लू ने उसे कितना मारा था और तो और झूठे इल्जाम लगाकर जेल भेज दिया। तुम्हारे शादी के एक महीने बाद जेल से छूटकर बाहर आया था वह। भला वो उस वक्त क्या करता ?
दोनों बहनें क्या बात कर रही हो ?  कुकर की सीटी कितने बार बज चुकी है। जरा उठकर गैस तो बंद कर दें। मैं तो बिछावन पर से उठ नहीं पा रही। रोहिणी घर के अंदर से ही आवाज लगाई।
चलो बैठे रहो तुम दोनों। मैंने गैस बंद कर दिया। नंदकिशोर कुर्सी पर बैठते हुए कहा।
और.... ज्योति तुम बिनोद से क्या बात कर रही थी। तुम्हें पता है पापा को बिनोद से कितना घृणा है। वे उसे पसंद नहीं करते फिर भी तुम...!! पापा को मालूम चला तो....!
चलने दो ना... वे तो शराब के नशे में पूरा दिन डुबे रहते हैं । उन्हें क्या पता हम लोग क्या करते हैं ?  कहां जाते हैं ? अभी देखा नहीं तुमने, कैसे बेहोश पड़े हुए हैं ?  बड़े आए घृणा करने वाले....! पसंद करने और ना करने वाले वो कौन होते हैं? दीदी की जिंदगी बर्बाद कर दिया , उस कमीनें टिल्लू से शादी कराकर....! कह रहा था , जिंदगी बन जाएगी। पुरखों की जमीन है। गेहूं , चावल से सालों भर अनाज भरा रहता है। शराबी के पास कभी जमीन बचा है , जो आज बचेगा। ज्योति एक ही सांस में कहते चली गई।
अबे... किशोर किधर मर गया। एक ग्लास पानी तो लाकर दे दे.. और खाना है तो वो भी दे देना। बहुत जोर की भुख लगी है। पेट पर हाथ फेरते हुए अपने बेटे नंदकिशोर को नागेश्वर दत्त आवाज लगाता है।
कहां मर गया सब के सब ...! लड़खड़ाते हुए नागेश्वर दत्त अंदर की तरफ आता है और पानी से भरे बाल्टी से टकराता है।
कल्याणी दौड़कर उसे सहारा देती है।
दूर हट बेशर्म , बेहया। मेरी तो समाज में नाक कटवा दी है। इज्जत चली गई मेरी तुम्हारी वजह से...! तलाक दे रही है उस इमानदार व्यक्ति से, जिसने हमें सहारा दिया था। उसपर झूठे इल्जाम लगाती है। मैं देखता हूं।  तुम उसे कैसे तलाक देती हो ? 

बाकि अगली कड़ी में....???

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