Ratan kirtaniya 30 Mar 2023 कहानियाँ अन्य ग्रामीण जीवन शैली के अन्तर्गत एक परिवार की मर्मिक चित्रण है 53082 0 Hindi :: हिंदी
पात्र परिचय
परिमल - परिवार का मुख्य
मधुरी - परिमल का पत्नी
भोला - पालतू कुत्ता ( परिमल का )
करिश्मा - परिमल का बेटी
कृष्णा - परिमल का बेटा
दिलीप - ज़मीनदार
देबू - ज़मीनदार का सुरक्षा गार्ड
कपिल - मुंशी
अशोक - मोटर साईकिल वाला
राजु - डाँक्टर
अनुप - पड़ोसी खेत वाला ( जो दो नम्बरी धंधा करता है )
मधुलता - अनुप का बेटी
अनिता - अनुप की पत्नी
( इस में और पात्र हैं कृष्णा , मधुलता, अनिता, आदि के बारे में भाग २ में लिखा जायेगा)
मधुरी :-
भगवान करे , ऐसा पति किसी को ना मिले , घर का कोई ध्यान नहीं , दिवस भर निकम्मा को घुमने - फिरने का ही कर्म है , घर का क्या हाल है ? वह बेखबर है ,आने दो आज अच्छी से खबर लूँगी , पूस आने वाला है , लेकिन अभी से यत्न नहीं किया तो कम्बल के लिए मुश्किल हो जाएगा , कम्बल जरूर खरीदाऊँगी पूस में मानों बदन की तमाम धमनियां की खून जम जाएगी ।
परिमल :-
मधुरी - ओ - मधुरी ( मधुरी नरज़ कुछ नहीं बोलती है ऐंठी पति कि ओर देखती रहतीहै।)
मधुरी :-
हाँ - हाँ ! मैं जिन्दा हूँ , भगवान करें तुम्हारे जैसा पति किसी और को ना मिलें । घर खेत में अपार कर्म है और उसे छोड़कर नबाव दिवस - दिवस घुमना - फिरना है ।
परिमल :-
ऐसी मत बोलो ! इस साल खेत - खलिहान का हाल ठीक नहीं है , मैं भी चिंता में हूँ ।
मधुरी :-
हाँ - हाँ क्या चिंता ? तो नबाव साहब दिवस भर कहाँ थे ?
परिमल :-
ज़मीनदार के पास गया था , ताकि खेत - खलिहान से अवगत करा दूँ ; धान का कर कम कर सकूँ ।
मधुरी :-
मुझे कुछ पता नहींं , पूस इने के पहले कम्बल लेना है , चाहे तुम ज़मीन - आकाश एक कर दो, पैसा ब्याज में लाओं । लेकिन पूस की ठंड के पहले कम्बल ले देना पड़ेगा ; याद रखना ।
करिश्मा :-
पिताजी ! कल स्कूल में परीक्षा फीस जमा करना है , नहीं तो मास्टर जी डटेगा ।
परिमल :-
रे भगवान ! इस साल फसल ठीक नहीं है , बीवी साहीबा कम्बल के लिए जान खा जा रही है । ऊपर से बच्ची की स्कूल फीस भी जमा करना है ; चलों खेत - खलिहान में लगन देते हैं ।
मधुरी :-
हाँ - हाँ कुछ भी करों ! कम्बल अगर ना मिली ; तो नल - जल - थल एक कर दूँगी ।
( परिमल मन ही मन सोचता है , भोर होते ही ज़मीनदार के पास जाऊँगा )
देबू :-
रुको - रुको ! कौन , क्या चाहिए ?
परिमल :-
भाई , ज़मीनदार से मिलना चाहता हूँ , आप से सनम्र निवेदन है कि आप साहब को खबर कर दीजिए , कि परिमल आप से मिलना चाहता है ।
देबू :-
साहब - साहब ( आवाज देता है )
दिलीप :-
कौन , अच्छा देबू ! क्या हुआँ ? जोर - जोर से चिल्ला रहे हो ?
देबू :-
परिमल आप से मिलना चाहता है ।
दिलीप :-
ठीक है अन्दर भेज दो ।
देबू :-
साहब आप को अन्दर बुलाया है ।
फरिमल :-
साहब - साहब ।
दिलीप :-
बैठो परिमल , इस साल फसल कैसी है , देखो इस साल , पीछले साल की तरह घटा मत कर देना ।
परिमल :-
नहीं साहब , फसल अभी ताक तो ठीक - ठाक है , पर साहब मौसम तो ठीक नहीं है ,क्या होगा ? लगता है दो - तीन बार सिंचाई करना होगा ।
दिलीप :-
हाँ तो करों क्या दिक्कत है ?
परिमल :-
साहब जी कुछ पैसा चाहिए था ,ताकि मोटर का जुगाड़ हो जाए ।
दिलीप :-
मोटर जहाँ तक ठीक है ; सिंचाई होगी तो फसल ज्यादा होगी , हिस्सा भी मिलेगा । पर पैसा क्यों ?
परिमल :-
साहब जी ! बच्ची की स्कूल फीस जमा करना है ।
दिलीप :-
हाँ पैसा तो हो जायेगा , पर ३% ब्याज में दूँगा , लेकिन तुम को ग्राँटेड के तौर पे कुछ सोना - चाँदी जमा रखना होगा । अगर मंजूर हो तो मुंशी से लिखा - पढ़ी करके पैसा ले लो ।
परिमल :-
हाँ - हाँ ठीक है ।
दिलीप :-
कितने पैसा चाहिए ?
परिमल :-
दो हजार ।
दिलीप :-
ठीक है मुंशी के पास जाओं ।
कपिल :-
आओं ,परिमल कैसे आना हुआँ ?
परिमल :-
मुंशी जी मुझे दो हजार पैसा चाहिए ।
कपिल :-
ठीक है पर लिखा - पढ़ी करना होगा , सोना - चाँदी भी जमा करना है , आप को कर्ज़ चुकाने में कितने समय चाहिए ?
परिमल :-
६ महीने लग सकते हैं।
कपिल :-
तो छ: महीने के हिसाब से लिखा - पढ़ी
करता हूँ , अगर छ: महीने में लेन - देन ना चुका, तो सोना - चाँदी वापस नहीं होगा , लेकिन पैसा ३% ब्याज से फसल से काटेगा ।
( इस तरह दोनोंं में सौदा तैय होते हैं )
परिमल :-
बेटी ! स्कूल फीस कितनी है ?
करिश्मा :-
५०० रु , पिताजी ।
परिमल :-
ले ! हाँ तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है ? देखो बेटी ; तेरी पिता कितना निर्धन है , तुम पढ़ो लिखो आगे बढ़ो कितनी आश है , इस पैसा का मान - सम्मान रखना ।
करिश्मा :-
माँ - माँ ; मैं स्कूल जा रही हूँ । आज आने में थोड़ी देर हो सकती है ।
परिमल :-
मधुरी ओ मधुरी कहाँ हो ? खाना निकालो ; हम दोनों को भूख लगे हैं । बेचारा भोला को भूख लगा है ।
मधुरी :-
हाँ - हाँ दे रही हूँ , खाने के बाद ; खेत जाओं और काम धंधा में ध्यान दो ,
ज़मीनदार साहब का कर्ज़ चुकाना है , और गिरवी सोना - चाँदी छुटाना है।
( परिमल खाना खाने के बाद कुत्ता को लेकर खेत चला जाता है । )
परिमल :-
रे भोला ! देख तो धान कैसा है ; ठीक है ना , इस साल फसल को गाय - बैल से रखवाला अच्छा से करना है , पीछले बार फसल को बर्बाद कर दिया था । दो - तीन सिंचाई भी करना है ।
परिमल :-
देख तो भोला , कौन दौड़ी - दौड़ी आ रही है, तेरी मालकिन की तरह लग रही है ,नज़र ठीक से नहीं आ रहा है ।
भोला :-
भौ - भौ - भौ ।
मधुरी :-
चलो घर चलो , एक बुरी खबर है , बेटी की दुर्घटना हो गई है ।
परिमल :-
कैसे हुआँ ?
मधुरी :-
एक मोटर साइकिल वाला ने बेटी की साइकिल को टक्कर मार दी है , वह अभी अस्पताल में भर्ती है , डाँक्टर ने कह , बिना मुख्य के हाथ नहीं लगाऊँगा।
परिमल :-
चलो - चलो जल्दी घर चलो , ( परिमल - मधुरी दोनों घर की ओर रवाना होते हैं )
मधुरी :-
नहा लो तब तक , मैं भी तैयार हो जाती हूँ ।
परिमल :-
बेटी क्या हाल में है ?
मधुरी :-
बोला है ; मामूली चोट आई है ।
परिमल :-
जल्दी तैयार हो जाओं । हमारा इकलौती बेटी है ।
परिमल :-
नमस्कार ; डाँ साहब जी ।
राजु :-
कौन ?
परिमल :-
सर !.हम दोनों करिश्मा के माँ - बाप हैं ।
राजु :-
अच्छा ।
परिमल :-
मेरी बेटी की हालत कैसी है ?
राजु :-
मामूली चोट है ; पर पर उसकी दाई हाथ टुट गई है , आप दोनों चाहें तो उस मोटर साईकिल
वाले के खिलाफ एफ , आई , आर कर सकते हो
।
परिमल :-
सर , हम दोनों को को थोड़ा सोचने का मौका दो ।
( इस तरह दोनों के बीच वर्तलप होती है ।)
परिमल :-
क्या करुँ मधुरी ?
मधुरी :-
देखो गलती हर किसी से भी हो सकता है , केस दर्ज करने से बेटी का हाथ तो नहीं जुड़ जाएगा , फिर भाग - दौड़ गवाह लाओं , तमाम परेशानियां , किसी को दौड़ने के लिए , खुद को भी दौड़ना पड़ता है ।
अशोक :-
चाचाजी , गलती हो गया है , इसके इलाज के पूरा खर्च उठाने. को ,मैं मंजूर हूँ ।
परिमल :-
क्या भरोसा , तुम वादा पूरा करोगे , या रास्ता में ही छोड़ के भाग जाओगे ।
मधुरी :-
ठीक है ।
परिमल :-
देखो मधुरी , अगर अशोक आधा रास्ता छोड़कर गया ,तो परेशानियां खुद को ही उठनी पड़ेगी । तुम कहती हो तो ठीक है ,बाद में हम से कुछ ना कहेना ।
( इस तरह उस की इलाज चलती है अत: दो महीने बाद अशोक का कुछ आता - पता नहीं रहता है )
मधुरी:-
इस साल खेत में ध्यान दो , पता मुझे बेटी के पीछे बहुत पैसा खर्च हुआँ है , अशोक दो महीने बाद तो नौ - दो - ग्यारह हो गया , आज कल भला मानष का नामों निशाना नहीं है , किसी पे विश्वास का जगत नहीं रहा ।
परिमल :-
हाँ , मैं तो उस समय कह था कि एफ , आई , आर कर देते तो ! कितना अच्छा होता , आज घर का हाल आटा - गीला ना होता ।
मधुरी :-
आज उस पे विश्वास कर के बड़ी भूल कर दिया हूँ , मानष - रुप राक्षस को पहचने में गलती कर बैठी । तुम मर्द हो ! अब तो ठीक हो गई है , इस साल पू, आने के पहले अगर कम्बल ना मिला तो घर में कुरुक्षेत्र का रण भूमि बन जाएगा याद रखना ।
परिमल :-
( मन ही मन में सोचती है जीवन में बहुत बेला व्यर्थ में बीताया हूँ ! पर अब घर का पूरा दायित्व निर्वाह करना है , विवाह के समय मधुरी का हाथ अपने हाथ मेंं देते समय ; उसकी पिता जी जो दो शब्द बोले थे , आज भी मुझे याद है ।)
मधुरी :-
ऐंठा क्यों बैठे हो , खाना तैयार हो गया , खाओ और खेत का रास्ता नापों ।
परिमल :-
हाँ बाबा जाता हूँ , चल भोला खेत का काम ठीक से करना है , शीश पे ज़मीनदार का कर्ज़ की बोझ है , चिंता खाई जा रही है , खेत के लिए दिवस - निशा एक कर देना है । --------------
(खेत का क्या हाल है ? फसल सुखने लगी है , कहीं से मोटर का व्यवस्था करना पड़ेगा ।)
अनुप :-
परिमल आरे भाई ! तेरा - मेरा खेत आस - पास है तो एक काम करना ।
परिमल :-
क्या भाई ?
अनुप :-
मेरे पास समय का अभाव है , सब्जियां लेकर आज ए बाजार , कल ओ बाजार जाना पड़ता है , और घर वाली बच्ची को देखने मायके गई है उसकी ( बच्ची ) का तबियत ठीक नहीं है , तू मेरे खेत में पानी पला दे तो ! बड़ी महरबानी होगा ।
परिमल :-
नहीं रे अपना भी धान सूख रहा है , नहीं होगा रे !
(परिमल बोल दिया है पर मन में सोचता है मेरे पास मोटर की समस्या है , क्यों ना एक सौदा कर लेते हैं । )
अनुप :-
देख तेरे पास मोटर की समस्या है , एक रास्ता है , चाहे तुम एक दोपहर मेरे खेत में पानी पला देना , फिर एक दोपहर अपने खेत में पानी पला सकते हो ।
( ए बात सुनकर मानो परिमल की मन का बात बोल दिया है अत: वह तुरन्त राजी हो जाता है । )
परिमल :-
(मधुरी से) अनुप भाई ने मानो एक वरदान दिया है ।
मधुरी :-
कैसे अनुप मुझे एक दम पसंद नहीं है , वे तो बहुत चालू और दो नम्बर धंधा वाला है कहाँँ गंजा , अफीन , चरस का कारोबार है , उस के साथ कोई भी समझोता मुझे ठीक नहीं लगती ।
परिमल :-
मैं तो उस के साथ कारोबार में तो काम नहीं कर रहा हूँ , बस उस के मोटर से उस के खेत में पानी पला देना है , फिर समय देख कर अपने खेत में ।
मधुरी :-
ठीक है ! दैख के भाई मुझे तो अनुप से डर लगता है , जो भी करों सोच समझकर करना , ज़मीनदार का कर्ज़ अदा करना है , फिर बेटा के लिए पैसा भी भेजना है , पता नहीं कृष्णा किस हाल में है ।
परिमल :-
कृष्णा !.बहुत दिन से चिट्ठी भी नहीं लिखा है उसे अपने माँँ - बाप - बहन की कोई चिंता नहीं , ऐसे नालयक बेटा ! रे भगवान ।
( इस तरह अनुप के खेत में गंजा का पौधा मिलता है , और खेत की देख - रेख परिमल करने के कारण पुलिस पकड़ के जेल भेज देता है , धीरे -.धीरे वह बीमार पड़ जाता है अचानक वह मृत्यु की गोद में सो जाता है ।)
दिलीप :-
देख के मौका - मारों चौका , मुंशी जाओं अपने लोगों को लेकर परिमल की खेतो को कब्जा कर ले लो ।
( इस तरह ज़मीनदार के मन में लालच जन्म लेता है और परिमल की खेत को कब्जा करने की साजिश रचता है )
इस का दूसरा भाग लिखना बचा है
रतन किर्तनीया
छत्तीसगढ़
जिला :- काँकेर
मो * 9343698231
9343600585