Kirti singh 08 May 2023 कहानियाँ समाजिक मैं मंदबुद्धि का बालक घर से लेकर स्कूल तक बुद्धिमान लोगों से खाता हूं बुद्धि का चोट। 28272 0 Hindi :: हिंदी
मैं मंदबुद्धि का बालक घर से लेकर स्कूल तक बुद्धिमान लोगों से खाता हूं बुद्धि का चोट, मै स्कूल के सबसे पीछे सीट पर बैठ टीचर के शब्दों को समझने का कोशिश करता तो कभी टीचर द्वारा अपने मंदबुद्धि को लेकर जलील हो जाता। स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे मेरे मंदबुद्धि को लेकर मजाक बनाते और हंसी उड़ाते तब मैं उनकी हंसी और मजाक को भी देर से समझ पाता और इसी तरह की चोट हरदम खाकर घर को लौट आता तो मां के आंचल में उन चोटो का मरहम पाता मगर कुछ लोग मुझ मंदबुद्धि बालक को लेकर मां को कई बातें सुना जाते तब वह मां का मलहम भी काम ना आता और घाव दोगुना बढ़ जाता । मैं समाज के बीच घायल होकर बिना सम्मान के घुटन भरी जिंदगी जीता दोस इतना कि मैं मंदबुद्धि का बालक। Kirti singh