Ranjana sharma 30 Mar 2023 कहानियाँ प्यार-महोब्बत Google 121700 0 Hindi :: हिंदी
अपराजिता घड़ी की अलार्म से हड़बड़ा कर उठती देखती 7:00 बज गई वह कहती मैं इतने देर तक सोते रही रात में मेरा बेटा संजय ने मेरी पैर की मालिश कर मुझे दवाई देकर सुला दिया था जिस कारण मुझे आराम मिलीऔर मैं इतनी देर तक सोते रही।वह अपने बेटे संजय को बोलती रुक जा बेटा मैं तेरे लिए कुछ बना देती हूं तब कॉलेज जाना ।उसका बेटा बोलता मां मैं आज बाहर नाश्ता कर लूंगा आप तैयार होकर अपने काम में चले जाइएगा और उसका बेटा चला जाता है।अपराजिता भी तैयार होकर जाने वाली थी कि उसका चप्पल उसे नहीं मिल रही थी तभी उसकी नज़र पास एक टेबल पे रखी बॉक्स पर जाती है वह बॉक्स उठाती तो उसके नीचे एक लेटर दबी रहती वह लेटर खोल कर देखती तो उसका बेटा लिखा रहता मम्मी आज तुम इस चप्पल को पहनकर जाना तुम तो अपने लिए चप्पल खरीदोगी नहीं इसलिए मैं तुम्हारे लिए खरीद दिया हूं तब उसे याद आती कि अच्छा तो इसके लिए वह कल रात में पैसा मांगा था उसकी मम्मी खुशी - खुशी अपना बेटा का दिया चप्पल पहन काम के लिए चली जाती।
धन्यवाद