राकेश 30 Mar 2023 कहानियाँ अन्य पोस्टमार्टम, कार्य में लापरवाही, मौत के बाद बदला, गैर जिम्मेदार डॉक्टर, पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी, चुड़ैल का इंसाफ, 53358 1 5 Hindi :: हिंदी
डॉक्टर अनुज उत्तराखंड में मसूरी का रहने वाला था। डॉक्टर अनुज उज्जैन के सरकारी अस्पताल के पोस्टमार्टम डिपार्टमेंट में डॉक्टर था। पोस्टमार्टम डिपार्टमेंट में जितने भी डॉक्टर थे, उन सब डॉक्टरों में डॉक्टर अनुज पोस्टमार्टम करने में बहुत होशियार था। लेकिन डॉक्टर अनुज की सबसे बड़ी कमजोरी थी, गैर जिम्मेदारी और अपने काम के प्रति लापरवाही। इसका सबसे बड़ा कारण था, बचपन में अनुज के माता पिता का स्वर्गवास होना। इसलिए उसे उसके मामा मामी ने पाल पोस कर बड़ा किया था। उसके मामा के पहले से ही पांच लड़कियां एक लड़का था। इस वजह से वह अपने बच्चों और अनुज को पढ़ाई और खाने-पीने के अलावा दुनियादारी की समझ नहीं दे पाए थे। एक दिन एक फैक्ट्री मे बड़े हादसे की वजह से पांच शव पोस्टमार्टम के लिए डॉ अनुज के अस्पताल में आते हैं। उस दिन डॉ अनुज का साथी डॉक्टर छुट्टी पर था। इसलिए डॉक्टर अनुज को अकेले ही रात तक उन पांचों शवो का पोस्टमार्टम करना पड़ता है। इसलिए वह बुरी तरह थक जाता है। उस दिन डॉक्टर अनुज को हल्का बुखार भी था। डॉक्टर अनुज अस्पताल के स्टाफ क्वार्टर में ही रहता था। गर्मियों का मौसम था, और उस दिन रात को उसके स्टाफ क्वार्टर मैं शॉर्ट सर्किट की वजह से रात के 2:30 बजे तक बिजली नहीं आती है। दूसरे दिन सुबह डॉ अनुज को ड्यूटी पर बहुत थकान महसूस होती है। उस दिन आठ 9 साल के बच्चे का शव पोस्टमार्टम के लिए आता है। और सोलह सत्रह बरस की युवती का जो रेड लाइट पर अखबार बेचती थी। उस युवती के साथ चार रईस लड़कों ने अपनी कार में बलात्कार किया था। उन चारों लड़कों को पुलिस ने पकड़ लिया था। पुलिस को उन लड़कों को सजा दिलाने के लिए बस इंतजार था, तो सिर्फ युवती की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का। डॉ अनुज थकान और बुखार की वजह से उस युवती के पोस्टमार्टम मे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बहुत बड़ी गैर जिम्मेदारी और लापरवाही कर देता है। इस वजह से वह चारों लड़के बरी हो जाते हैं। और उस युवती को इंसाफ नहीं मिल पाता। अपने कार्य में डॉ अनुज की गैर जिम्मेदारी और लापरवाही उसके जीवन की सबसे बड़ी गलती थी। यह गलती उसके जीवन को एक बहुत बड़े संकट में डाल देती है। कुछ दिनों के बाद डॉक्टर अनुज की ममेरी बहन की शादी होती है। डॉ अनुज अस्पताल से कुछ दिन की छुट्टी लेकर अपनी कार से अपनी ममेरी बहन की शादी में अपनी कार से अकेले जाता है। और रात को 11:00 बजे उत्तराखंड हाईवे पर पहुंचकर उसे गाड़ी ट्रक बस दिखाई नहीं देते। हाईवे पर चारों तरफ सन्नाटा दिखाई देता है। उसे पहली बार जीवन मे डर और भय महसूस होता है। अचानक उसकी गाड़ी रुक जाती है। अपनी गाड़ी का पेट्रोल टैंक को देखता है। तो गाड़ी में एक बूंद भी पेट्रोल नहीं था। गाड़ी से पेट्रोल गायब होने की वजह से उसे और घबराहट डर महसूस होने लगती है। वह किसी तरह गाड़ी को धक्का मार मार हाईवे की सड़क के किनारे पर खड़ा कर देता है। इतने में अचानक एक बड़ा सा उल्लू अपने पर तेज तेज फड़फड़ा कर, डॉ अनुज पर हमला कर देता है। और उसके चेहरे हाथों को अपने मुकीले पंजों से लहूलुहान कर देता है। डॉ अनुज पर हमला करने के बाद वह उल्लू सामने एक पुराने पीपल के पेड़ पर जाकर कहीं छुप जाता है। डॉ अनुज अपने मोबाइल की टॉर्च जलाकर गाड़ी में से कैन निकालकर पेट्रोल पंप को ढूंढने के लिए हाईवे रोड पर चलने लगता है। अचानक वही उल्लू आगे आगे सड़क पर पैदल पैदल चलने लगता है। उसी समय डॉ अनुज के मोबाइल की टॉर्च की रोशनी बंद हो जाती है। लेकिन उल्लू की आंखों की रोशनी से सड़क दूर तक दिखाई देती है। डॉक्टर अनुज को सामने टूटा फूटा पेट्रोल पंप दिखाई देता है। पेट्रोल पंप पर पहुंचने के बाद डॉक्टर अनुज दो तीन बार तेज आवाज लगाता है। फिर उसके बाद पेट्रोल पंप के अंदर से एक बूढ़ा व्यक्ति ओवरकोट पहने बाहर आता है। लेकिन वह डॉक्टर अनुज को कैन में पेट्रोल देने से मना करता है। इतने में एक युवती एक बच्चे के साथ वहां आती है। और पेट्रोल पंप के कर्मचारी से विनती करके कहती है कि हम सब साथ में इस सर्दी की अंधेरी रात में फंस गए हैं। कृपया हमारी पेट्रोल देकर मदद कर दे। इसलिए पेट्रोल पंप का कर्मचारी उनकी परेशानी समझ कर डॉ अनुज को पेट्रोल दे देता है। उस युवती की यह बात सुनकर डॉ अनुज सोचता है शायद यह युवती बच्चे के साथ फस गई है और मुझसे लिफ्ट लेना चाह रही है। इसलिए डॉक्टर अनुज उस युवती की यह बात सुनकर चुप ही रहता है। वह युवती डॉक्टर अनुज से कहती है कि "हमें भी आगे तक छोड़ दो मे और मेरा बेटा इस अंधेरी रात में फंस गए हैं।" उस युवती की वजह से डॉ अनुज को पेट्रोल मिला था इसलिए वह उसे और उसके बेटे को लिफ्ट देने के लिए तैयार हो जाता है। परंतु डॉक्टर अनुज यह समझ नहीं पा रहा था कि यह लड़की चेहरे से सोलह साल की लग रही है। यह बच्चा इसका कैसे हो सकता है। वह लड़की इतनी खूबसूरत थी, कि डॉ अनुज अपने मन में सोचता है, अगर ऐसी ही कोई लड़की मेरे जीवन में आ जाए तो, मे उससे तुरंत ही शादी कर लूंगा। डॉ अनुज उस लड़की और बच्चे के साथ चलते चलते दो-तीन किलोमीटर पार कर लेता है। लेकिन वह अपनी कार तक नहीं पहुंच पाता है। वह यह सोच ही रहा था कि हम कार तक क्यों नहीं पहुंच पा रहे हैं तभी उसकी नजर उस बच्चे के पैरों पर पड़ती है। और उस बच्चे के उल्टे पैर देखकर डॉ अनुज बुरी तरह डर जाता है। फिर डॉक्टर अनुज उस युवती की तरफ देखता है। तो उसका का सड़ा गला चेहरा पूर सर गंजा लाल लाल मोटी मोटी आंखें सड़े हुए दांत लंबे लंबे नाखून देख कर डॉ अनुज बुरी तरह डर जाता है। और डर घबराहट में रोड की दूसरी तरफ भागने लगता है। घबराहट में वह जिस गाड़ी से टकराता है। उस गाड़ी में से एक व्यक्ति उतरता है वह शिमला के चर्च में पादरी था। वह पादरी अनुज के पीछे उस चुड़ैल और बच्चे भूत को आता देख यीशु मसीह का क्रॉस उनकी तरफ कर देता है और वह लड़की चुड़ैल और वह बच्चा बहुत उसी समय गायब हो जाते हैं। चर्च का पादरी उस युवती चुड़ैल को अपने बस में करके उसे वहां से भागने के लिए कहता है । लेकिन वह चुड़ैल कहती है मैं जब तक इस डॉक्टर से बदला नहीं ले लूंगी तब तक मेरी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। चर्च का पादरी उस चुड़ैल से पूछता है तुम इससे इस बात का बदला लेना चाहती हो। तो वह चुड़ैल कहती है कि "इस डॉक्टर ने मेरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट गलत बनाई थी इस वजह से मेरे कातिल छूट गए थे।" चर्च का पादरी उस लड़की का नाम पूछ कर और सारी घटना की जानकारी लेकर डॉ अनुज को बताता है। उस दिन डॉ अनुज को महसूस होता है कि मैं कितने जिम्मेदारी के पद कार्य कर रहा हूं। और मेरी लापरवाही गैर जिम्मेदारी से किसी का बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। इसलिए डॉक्टर अनुज उस चुड़ैल से और उस बच्चे भूत से माफी मांग कर उसी समय पुलिस स्टेशन जाकर अपना गुनाह कबूल कर लेता है। और कुछ दिन केस चलने के बाद उस युवती चुड़ैल के चारों कातिलों को कानून सजा देता है।
3 years ago