Prince 06 Jun 2023 कहानियाँ समाजिक #Google #साहित्य लाइव #समाजिक #हिन्दी साहित्य #हिन्दी कहानी 32597 0 Hindi :: हिंदी
गर्मियो के दिन थे शाम को करीब 4 बजे घर से बाहर खेलने के लिए निकला तभी मेरी नजर थोड़ी दूर एक पेड के नीचे खेलते पपी पर पड़ी मै उसे देखता रहा सहसा उसने मुझे देखा ओर उसकी आँखो की प्यारी चमक और मासूम भोले चेहरे ने मुझे उसकी तरफ जाने को आशक्त किया मैं उसके पास गया और उसके साथ खेलने मे व्यस्त हो गया थोडी देर बाद मेरे दोस्त ने मुझे आवाज लगाते हुए - " अरे ! जल्दी चल खेलने नहीं है क्या तुझको ? मैंने उसे मना किया और वह चल ठीक है कहकर चल दिया पर वह मेरा धनिष्ठ मित्र जो ठहरा वापस आया और मेरे साथ वह भी उस पपी के साथ खेलने मे व्यस्त हो गया शाम ढल गई अब हम दोनों घर की ओर चल दिए।इतनी देर खेलने के बाद भूख बहुत लगी थी तो मैं खाना खाने बैठा तभी मुझे याद आया कि भूख तो पपी को भी लगी होगी तो मैंने खाना पूरा होने के बाद 7-8 रोटीया उसके परिवार के लिए लेकर माँ से छिपते छिपाते चल दिया।
तभी माँ ने पीछे से आवाज लगाई - " कहाँ जा रहा है और ये तेरे हाथ मे क्या है? मैं डरकर कही नही बस ऐसे ही कुत्तो को रोटी डालने जा रहा हूँ तभी खडूशपन करते हुए दादी बोली - " लुटा दे सब लूटा दे इन आवारा कुत्तो मे आया बडा दानी "। दरअसल माँ और दादी की कुछ खास बनती नही थी तो माँ ने विरोध करते हुए कहा - " तुम सदा ऐसी ही रहना कभी सोचा भी हो कुछ दान - धर्म का तो जाने ना तू जा डाल आ रोटी"।
मेरे वहां पहुंचते ही वह दौड़ कर मेरे पास आया उसकी स्नेह भरी आंखों ने मेरा दिल जीत लिया इतने कम समय में हमारे बीच में अच्छी दोस्ती हो गई थी।
यह सिलसिला लंबे समय तक चला और आज इस बात को बहुत लम्बा समय हो चुका था जो कि एक सुनहरी याद मे बदल चुका है। आज भी जब उसके बारे मे सोचता हूँ तो आँखे नम हो जाती है।
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लेखक : प्रिंस ✒️📗
Hey there I'm Prince from VPO kuralsi district Muzaffarnagar UP - 251309. I keenly love to write sto...