Baba vishwa 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक सामाजिक कविता 32239 0 Hindi :: हिंदी
कैसे भुल गए हम क्या यही संस्कृती हमारी है। कही जुर्म कही पाप हो रहा कही बेबसी तो कही लाचारी है। कैसे भुल गए हम क्या यही संस्कृती हमारी है। क्या हो गया इस देश के युवाओं को कोई बन रहा हत्यारा कोई बन रहा बलात्कारी है। कही जिस्म का सौदा हो रहा कही प्रेम के लिए हो रहा मारा मारी है। कैसे भुल गए हम क्या यही संस्कृती हमारी है। कही भ्रष्टाचार कही गरीबी कही भूख मारी तो कही बेरोजगारी है। कैसे भुल गए हम क्या यही संस्कृती हमारी है।