Kranti Raj 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य 14842 0 Hindi :: हिंदी
दिन पर दिन मेरी जिंदगी
बदली सी लगाती है !
चंचल शोक हवाएं पगली सी लगती है !देखा मैंने जब से प्यार की बुँदे टपकने लगी,
खिड़की से हमें कोई झाकने लगी ,
सावन की झूलो में मन मेरा झूमने लगी सूरज और चाँद साथ साथ चलने लगी !
मानो किस दिशा से नशीली हवा चलने लगी ,
बाया आँख मेरी कुछ पल फड़कने लगी ,
दुःख की कहर की बुँदे टपकने लगी ,
शरीर के हर रोम रोम अब शहलने लगी दुःख की घर में मानो प्यार टपकने लगी क्रांति जीवन फिर भी सुगन्धित भाने लगी !
क्रांतिराज बिहारी