Santosh kumar koli ' अकेला' 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य बाल जीवन 12470 0 Hindi :: हिंदी
वाह! क्या कहना बाल जीवन का। यह उन्मुक्त, पक्षी नील गगन का। बालक विश्व में, ईश्वर की अनुपम विभूति। विधाता की सुंदर रचना, प्रकृति की निधि अनूठी। घर का उजाला, मां बाप के प्यार की अंगूठी। कलेजे का टुकड़ा, आंख का तारा, बात नहीं है झूठी। यह खिला पुष्प, गृहस्थ रूपी उपवन का। यह उन्मुक्त, पक्षी नील गगन का। रोने मचलने का, काम झट पट। सभी हाथो से बड़ा है, यह बाल हाथ। मिट्टी को भी, कर जाए चट पट। और ज्यादा, तो बड़ी मां की अदालत। भूखा प्यासा, नंग धड़ंग, कुछ ध्यान नहीं तान का। यह उन्मुक्त, पक्षी नील गगन का। कभी सोना, कभी रोना, कभी सर्प की माला। कोई चिंता दुविधा नहीं, जीवन बाला आला। सर्दी, गर्मी,वर्षा, हर मौसम में राम रखवाला। इसी मासूमियत में बंद है, सुंदर भविष्य का ताला। बालक जैसा कोई नहीं, सच्चे मन का। यह उन्मुक्त, पक्षी नील गगन का। वाह, क्या कहना बाल जीवन का। यह उन्मुक्त, पक्षी नील गगन का।