Rambriksh Bahadurpuri 30 Mar 2023 कविताएँ देश-प्रेम #Rambriksh kavita#Raktdaan per kavita#ambedkar Nagar poetry 95012 0 Hindi :: हिंदी
कविता-रक्तदान
जय जय रक्तदान हे!
मानव धर्म-प्रान हे!
मानव जान बचाता है तू,
जीवन नया दिलाता है तू,
जीवन दान कहाता है तू,
प्रकृति का वरदान हे!
मानव धर्म-प्रान हे!
एक रूप जन जन में बहता,
हिन्दू मुस्लिम एक समझता,
रिस्ता खून खून का रखता,
जग का महादान हे!
मानव धर्म-प्रान हे!
दीन हीन के जीवन दाता
मानवता का धर्म निभाता
ऊंच नीच का भेद मिटाता
दान कर्म महान हे!
मानव धर्म-प्रान हे!
मिलता ना उपचार कहीं जब,
रक्तदान का दान सही तब
करता है उपकार यही तब,
दया धर्म कल्याण हे!
मानव धर्म-प्रान हे!
रचनाकार- रामवृक्ष, अम्बेडकरनगर।
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...