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आज पंक्तिया मेरी जो ये तुम पढ़ते हो

DINESH KUMAR KEER 25 May 2023 कविताएँ समाजिक 27479 0 Hindi :: हिंदी

सभी का तहेदिल से आभार... 

कौन समझाए बेसबब संसार को 
मैं बखूबी निभाता हूं किरदार को 

जीतने की नहीं होड़ में शामिल मैं 
हंस के स्वीकारता हूं निजी हार को 

प्रेम सौहार्द से हो भरी जिंदगी 
छोड़ देता हूं छोटी सी तकरार को 

दूसरों को मिले हर खुशी या प्यार
भूल जाता हूं अपने भी अधिकार को 

आज पंक्तिया मेरी जो ये तुम पढ़ते हो 
देता आभार हूं अपने परिवार को...

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