MD SHAYEED ALAM 15 Nov 2025 कविताएँ देश-प्रेम कविता देश प्रेम 7146 0 Hindi :: हिंदी
आज जिंदगी को पीछे मुड़कर देखा हमने, क्या खोया और क्या पाया है हमने? कि बेशक ऐ दोस्त तुझसे कम कमाया है हमने, पर अपनी तरक्की के लिए, किसी को ना गिराया है हमने। आज तू जिस दहलीज पर है खड़ा, हम ना पहुंच सकेंगे कभी वहां। क्योंकि ऐ दोस्त जब आई थी चुनने की बारी, तूने दौलत को चुना, हमने अपने वतन को चुना। जब वतन को चुना हमने, तो यह तसल्ली है मेरे मन में। कि कभी मर जाएं अगर वतन के लिए, मिलेगा तिरंगा हमें अपने कफन के लिए। ऐ दोस्त ये सबको नसीब नहीं होता है, कर देना अपनी जिंदगी कुर्बान अपने वतन के लिए।।