Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

आत्म- स्वाभिमान

Santosh kumar koli ' अकेला' 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक आत्म- स्वाभिमान 40613 0 Hindi :: हिंदी

आपसे दूर, चाहे शरीक हूं।
मैं जैसा भी हूं, ठीक हूं।
छोटा- बड़ा, अच्छा- बुरा जैसा भी हूं।
पर मैं, मैं हूं, चाहे कैसा भी हूं।
मेरे जैसा, दूसरा हो नहीं सकता।
मैं, मैं नहीं, जब कोई मेरा -सा लगता।
चाहे मैं नीम, चाहे ईख हूं।
मैं जैसा भी हूं, ठीक हूं।
तासीर बदलने से, मैं, मैं नहीं।
विष, विष, अमृत, अमृत नहीं।
इसी संग रहना, इसी संग मरना है।
फितरत ही पहचान, अपना गहना है।
मैं, मैं हूं, यही मान अभिमान है।
यही खुशी का राज, यही  पहिचान है।
क्यों, दूसरों से तुलना करूं?
जीवन को, क्यों दुख से भरूं?
अमीरी से दूर, चाहे नज़दीक हूं।
मैं जैसा भी हूं, ठीक हूं।
आपसे दूर, चाहे शरीक हूं।
मैं जैसा भी हूं, ठीक हूं।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: