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अब न गहरी नींद में सो सकोगे तुम

Sanam kumari Shivani 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत 83159 0 Hindi :: हिंदी

अब न गहरी नींद में सो सकोगे तुम
गीत गाकर जगाने आ रही हूं
अंदर अस्तचल में तुम्हें जाने ना दूंगी
अरुण उदयचल सजाने आ रही हूं
कल्पना में आज तक सिहरते रहे तुम
अब तुम्हे आकाश में उड़ते न दूंगी 
आज धरती पर बसाने आ रही हूं
जब तुम ना रहोगे धरती पर
सुना रहेगा जग सारा
कहीं धूप सी झील मिल छाया
कहीं गड्ढों की खाई
अब में धरती पर अपनी अस्तित्व को बसाने आ रही हूं।
अब न गहरी नींद में सो सकोगे तुम
गीत गाकर जगाने आ रही हूं।

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