Rambriksh Bahadurpuri 11 Jul 2026 कविताएँ समाजिक 584 0 Hindi :: हिंदी
ऐसा टीचर देखा है सुबह समय से देर में आना शाम समय से जल्दी जाना दो चार को लेके गप शप करना लम्बा लम्बा फेंका है ऐसा टीचर देखा है। दूर दूर तक पहुॅंच है जिसकी सांसद और विधायक तक गुण्डे लुच्चे और लफंगे लायक और नालायक तक देख के इनको ऐसे लगता टीचर नहीं ये नेता हैं ऐसा टीचर देखा है। दिन गिनते हैं वेतन आए बच्चों को न तनिक पढ़ाये बैठ के दिन भर तोड़ै कुर्सी देते सबको धोखा हैं ऐसा टीचर देखा है। बच्चे आयें या न आयें फर्क नहीं कुछ पड़ता है बच्चों की संख्या से ज्यादा रोज एम.डी.एम.चढ़ता है लेखा जोखा फिट कागज पर करते खेल अनोखा है ऐसा टीचर देखा है। कैसी गिला शिकायत किसको जनता नेता सत्ता से मस्त पड़े हैं अभिभावक भी मतलब किसको शिक्षा से बच्चों के बदमाशी पर भी न रोका न छेका है ऐसा टीचर देखा है। रामवृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...