Rambriksh Bahadurpuri 23 Apr 2025 कविताएँ समाजिक #रामवृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश #रामवृक्ष बहादुरपुरी साहित्यकार #अम्बेडकर नगर पोइट्री #कर्म पर कविता #कर्म के महत्व पर कविता 31691 0 Hindi :: हिंदी
अनमोल अपने कर्म हैं अनमोल है यह जिंदगी अनमोल अपने कर्म हैं हैं धैर्य उत्तम साधना नेकी ही उत्तम धर्म है पल भर का सुख पल भर का दुख न खुशी न दुख निरन्तर जीवन ही एक मर्म है। क्यों रखे हम पांव पीछे? क्यों हारे हम जीत से? क्यों नहीं कुछ कर दिखाएं! प्यारे मन के मीत से, हो डगर अनजान अपना बाॅंधा पग पग हो खड़े लौट जाए पथ से क्यों हम परिस्थितियाॅं विपरीत से। पथ अकेला उम्र भर आसान चलना है नहीं भीड़ में क्या भेड़ियों सा सिंह है चलता कहीं ? बांध लो बस गांठ मन में है चूमना आकाश को बैठ जाना हार कर न लौट जाना है सही? जिंदगी का क्या भरोसा जीत जीवन जंग लो हार हो या दुःख सभी को अपने रंग में रंग लो हो क्षणिक या हो तनिक या जिंदगी जैसा भी हो विस्तृत जीवन बने या एक पल का संग हो। कर्म के अनुसार ही बनता बिगड़ता भाग्य है कर्म के अनुसार ही होता जगत अनुराग है फिर छोड़ जाना क्यों भरोसे भाग्य के सुकर्म है अनमोल है यह जिंदगी अनमोल अपने कर्म हैं रचनाकार रामवृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...