Rajnish khandal 22 Feb 2025 कविताएँ दुःखद #died 51591 0 Hindi :: हिंदी
एक मरा हुआ देखत सोच रा, मै तो आज घर राम के चला।
पर पीछे से ये क्या हो रहा, मेरा परिवार सारा रो रहा।
मेरा घर चौपाल आज बना हुआं, हर कोई भला - बुरा मुझे बोल रहा।
मेरी देह के साथ विचित्र सा कुछ हो रहा, हर कोई मुझे मिल नहला रहा।
वो चलता फिरता सेठ है, आज सो रहा, किसी के बुलाये भी ना बोल.. रहा।
मेरा बेटा भी मुझे वहां ले जा रहा है, जिस अग्नि से मैं उसे बचाता रहा।
देखु बेटे से तो पोता भला, जो दंडवत मेरे आगे हो रहा।
रचनाकार = रजनीश खाण्डल