Poonam Mishra 17 Jun 2023 कविताएँ समाजिक खिलखिला ने लगे बच्चों की तरह 30821 0 Hindi :: हिंदी
रूठते थे हम भी कभी बच्चों की तरह ! अपनी चोटी को ठीक से बनाने की जिद करते थे हम भी कभी। हंसते थे कभी खिलखिला कर। राह पर यूं ही । रहते थे मस्त निर्भीक ,स्वतंत्र, होकर यू अपने घर में । पुरानी यादों में बस गई है । वह सभी पुरानी यादें याद करके लगता है यह भी कल की ही तो बात है उम्र यूं गुजर गई न जाने कब छूट गया सब पीछे वही