Jyoti Aggarwal 11 May 2026 कविताएँ हास्य-व्यंग बरसात 6037 0 Hindi :: हिंदी
बारिश के मौसम में महसूस हुई मुझे तन्हाई खिड़की के पास बैठी थी कुछ बंदे मुझ पर भी आई मन में एक अजीब सा ख्याल आया भगवान ने बरसात का भी क्या मौसम बनाया टप टप करता पानी हर जगह बरसता पानी लगता है मानो बादल की आंखों में भर आया पानी कोई कूदता कोई नहाता कोई बच बच कर चलता उधर बादल भी मदमस्त होकर बरसता जाता मुझे बैठे-बैठे शाम हो गई खिड़की के पास ऐसे में ख्याल आया कोई करीब हो मेरा खास
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