Raj Ashok 14 Apr 2023 कविताएँ समाजिक बेहतर भविष्य 41833 0 Hindi :: हिंदी
शहरों का ये , घनाँ काला घुआँ , ओर ज़िन्दगी की ऊमीद में, चलते लोग । कई, बेहतर भविष्य । तो, कहीं हारते लोग बढ़ती आबादी का हे। ये.... कोहराम, के रहने को , दो कदम जमीन नहीं । फिर भी , सपनो कि भागम में सामिल है। ये लोग क्या ? कह दे इनहे ।के कैसे... शहरो को सुन्दर बनाना है। पहले , सोच सबल बने। तो सोचे पहले कैसे लाऐ, बढ़ती आबादीयों मे कुछ टकराव । कोई कैसे नया वृक्ष लगाऐ ।