Kranti Raj 10 Jun 2023 कविताएँ समाजिक 35548 0 Hindi :: हिंदी
मासुम सी जिंदगी कली सुकुमारी पिता के गुरूर सिया सुकुमारी चंचल सी मासुम पापा के परी माता की लाडली बहुत ही प्यारी कदम कदम पर चलना बहुत ही सम्भल के ठग लोग बैठा है ,रंग रूप बदल के मीठी मीठी तान सुनाकर मन तोहरा के भीवे अधिकतर न संयासी होता ,न होता साधु रंग बदल कर भेश बदल कर खेलता रहता आज कल खेल जीवन में आगे बढना है तो रखो पग डर डर के बेटी अपना रखना ध्यान भविष्य हो मेरे कल के कवि -क्रान्तिराज बिहारी दिनांक-10-06-23