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भारत के बल

DIGVIJAY NATH DUBEY 07 Mar 2026 कविताएँ देश-प्रेम #indianarmy#bharatmatakijay#deshbhakti 6481 0 Hindi :: हिंदी

जब सरफरोश की ज्वाला 
भारत के दिल में उठती है 
तब दुश्मन के सिंहासन की
चारों पासाएं हिलती हैं
हिल जाता उत्तर का हिम खंड 
दक्षिण का विंध्य दहल उठता
चारों दिशाओं में सागर की
लहरों का है स्तर उठता 
सीमाओं पर दुश्मन के सीने
सांप लौटने लगता है 
अपना संरक्षण करने को
साम्राज्य दौड़ने लगता है
जब ले दहाड़ गुंजन करते 
भारत के सीमा संरक्षक
तब आसमान से अग्नि की
चलने लगती शक्ति भक्षक
देश सुरक्षित आप सुरक्षित 
सब सेना के दल बल से है
नतमस्तक उन जाबाजों को
भारत का बल जिस बल से है !

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