संदीप कुमार सिंह 30 Apr 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाजिक हित में है। जिस पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 41934 0 Hindi :: हिंदी
बिगड़े बोल पटेल के,तभी खत्म है साख। चकमा देते हैं सभी, ऐसों को कर राख।। बिगड़े बोल पटेल के,कहते बुरा समाज। शिकवा करते लोग हैं,बदतर मय है आज।। बिगड़े बोल पटेल के,बने गलत संदेश। अपना ही नुकसान कर,बने शैतान लेश।। बिगड़े बोल पटेल के,असर करे मत खास। वाणी मृदु हो तो सभी,आते रहते पास।। बिगड़े बोल पटेल के,इज्जत किया खराब। सभी और बद शोर है,उसको मिले अजाब।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....