कांतिलाल चौधरी 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य Google 59489 0 Hindi :: हिंदी
( चल पड़े किसान खेतों में) सिर पर पगड़ी कमर में धोती पैरों में चमडे़ के जूते हल कंधे रख चला किसान आगे-आगे चल रहे बैल लगते बिल्कुल सीधे साधे धरती मां की किस्मत जागे सर्दी गर्मी हो बरसात दिन हो चाहे रात लु आंधी झंझावात में मेहनत करना उसका काम है छोटा सा उसका घर माटी गोबर से लिपका महलो से भी लगता सुंदर हल कधें रख चला किसान — कांतिलाल चौधरी रानीवाड़ा (जालौर) राजस्थान