Meenakshi Tyagi 01 Jul 2023 कविताएँ धार्मिक Aruna Gupta 37916 0 Hindi :: हिंदी
विचारों का मंथन कर, आत्म को प्रसन्न कर
चलो मैं भी शुद्ध बन जाता हूं।
सांसारिकता का त्याग कर, ईर्ष्या द्वेष त्यागकर
मोह- माया छोड़कर, फिर से प्रयास कर
चलों मैं भी प्रबुद्ध बन जाता हूं।
मन का विरोध कर, सुख – दुख को छोड़कर,
चलों मैं भी अनिरुद्ध बन जाता हूं।
प्रेम भाषा बोलकर, अपने हृदय को खोलकर
चलों मैं भी बुद्ध बन जाता हूं।।
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