Raj Ashok 23 Jun 2023 कविताएँ समाजिक साहसी 33490 0 Hindi :: हिंदी
तरह- तरह, से करतब करते । वो आसमान के पक्षी , बोलो, अब कहाँ है।? देखों ! उन्हें आसमान ढूँढ रहा है। सुबह की वो चहचहाहट, यो चिड़ियों का चहकना । एक, आवाज़ मे कहता था। चलों। सवेरा हो गया। अब जागों । हाथों मे है। किस्मत तुम्हारे ,थोड़ी कर्म की फसल उगाले। तुम्हारी , मेहनत ही, एक दिन बोलेगी । साहसी बन कर, देखों जमाने को । हिम्मत के आगे। चट्टानें भी देती है। रास्तें सीख हजारों है। इन नन्ही-नन्ही उ़डानों में ,ये कलेंजा ,आसमानों का चीर के चलते है। कुछ, दिन तुम भी खुद को एक पक्षी बनालों।