Sudha Chaudhary 31 May 2023 कविताएँ दुःखद 29665 0 Hindi :: हिंदी
छाई है आज लालिमा, पंथ रंजित तन खंडित है। रुक कर कोई देख ले मनुहार तो, किस क्षण कोई लज्जित है इस बार तो। दमन थी तुम्हारी नीति में, कब तक वहन करूं। मूक सी हो कर रहूं उफ तक न कहूं। सुधा चौधरी बस्ती