Archana Singh 30 May 2026 कविताएँ दुःखद दर्द 1722 0 Hindi :: हिंदी
" दर्द " शब्दों में ना लिख पाऊं तेरी कमी को ... तेरे बिना अधूरा सा लगता हैं जिंदगी को ! लोगों को लगता हैं ,मैं मजबूत बन गई और... मैं अपने आंसू छुपाते-छुपाते थक गई ! मजबूत होना भी नुकसान दे गया , और ... लोगों को मेरी तकलीफ़ पर एक चर्चा मिल गया ! जब अपनों ने साथ छोड़ा तो ... मैंने भी भ्रम में जीना छोड़ दिया ! रिश्तो का मांझा अब कमजोर पड़ गया ,और ... तेरे ही जोड़ें रिश्ते , मुझे अंदर से तोड़ गया ! हर दर्द की इकलौती गवाह बन गई, और... अपनी प्रवीणता से आगे बढ़ती चली गई...!! स्वरचित: अर्चना सिंह ✍🏻