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देश प्रेम

Avnish Dutt 20 Apr 2026 कविताएँ देश-प्रेम Desh prem, Bhagat Singh k upar kavita, Bhagat singh ka desh prem, Bhagat singh ka balidan, Bhagat singh ki prasansha 8226 0 Hindi :: हिंदी

देश प्रेम

तेरे बलिदानों ने कुछ अलग लिखी कहानी थी,
शौर्य, पराक्रम, साहस और देश के प्रति प्रेम से सजी तेरी पूरी जवानी थी।

जब बच्चे लड़कपन के झूलों में झूलते हैं,
उनकी समझ की कोपलें भी नहीं फूलते हैं,
उस उम्र में तूने मिट्टी को अपनी नन्हीं मुट्ठी में भर लिया था,
देश को आज़ादी दिलाने का भार अपने अंतर्मन में धर लिया था।

तेरे बलिदानों की सीमा को कोई कैसे जान सकता है,
अपने से ज़्यादा जिसे देश का विचार हो,
भला उसे कौन बाँध सकता है।

माँ ने तुम्हारी परवरिश कुछ अलग ही की होगी शायद,
जिस उम्र में सब साथी चुनते हैं,
तुमने फाँसी का फंदा गले लगाया है।

मातृभूमि की रक्षा से बड़ा कोई धर्म नहीं,
यह जन-जन को समझाया है।
“ मेरे भगत वरगा कोई होर नहीं हो सकदा ”,
अपनी माँ का यह कहना सार्थक बनाया

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