संदीप कुमार सिंह 10 Oct 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 33253 0 Hindi :: हिंदी
धरती मां की बात है निराली, सदियों से ये हमसब को है पाली। ममता की जी अदभुत खजाना है, इनसे से ही दुनिया है चल रही। ग्रहों में जो सबसे उत्तम ग्रह हैं, जहां पर जीवन जीना हुआ सम्भव। जिनके आंचल में प्यार ही प्यार है, और रंग_बिरंग के त्योहार भी है। धरती माता के गोद में ही, सबके अरमान हैं खिलते। यहां जन्म_मरण का सिलसिला, अनवरत चालू है रहता। जहां कुदरती संपदाओं का ढेर है, रीति_रिवाज की है परम्परा। सभ्यता_संस्कृति की बंदिश है, यहां कानून का शिकंजा है। ब्रह्माण्ड के सभी देवी_देवताओं का, यहीं पर आस्था का केंद्र है। यहां धर्म है, अधर्म पर धर्म का पहरा है। बदलते मौसम का मजा है, रात_दिन का होना खूबसूरत है। हवाओं की गति की अनुभूति है, सूर्य_चंद्र का सुखदाई प्रभाव है। अम्बर जैसा अनोखा अर्श है, धरती जैसी मायावी फर्श है। तारों का आसमान में चमकना, धरती वासियों को है बेहद लुभाती। यहां महादेशों का वर्गीकरण है, फिर देश_विदेश का अपना_अपना जलवा । यहां विज्ञान का है चमत्कार, हवा में उड़ने का है यंत्र। यहां प्रकृति प्रदत्त सुंदरता, ज्ञान का यहां बोलबाला। विकास की लहर यहां, आविष्कार की ललक यहां। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....