Raj Ashok 19 Jun 2023 कविताएँ दुःखद सवेरा 43212 0 Hindi :: हिंदी
दिल, खुद सँम्भल गया।
जमाने की , हर एक चोट से
यही तो ,एक बात है।
अपने ,दिवाने से ,
इस दिल मे,
जो,बात समझी कहाँ , जमाने ने
हर -एक हुनर हमने ,
सिखा है।
ये जाने , यहाँ- कहाँ से ।
याद है ।
हर वक्त दिखावा ,
ये झूठी फिक्र का , ,
यहाँ लोगों का ये तमाशा ,....
........ अच्छा लगता है ।
भला, विश्वास की
कच्ची पगड़डी पर चले ।
तो कैसे ?
एक चिन्तित सा सवेरा
और उसकी , ढुढती,
हर सुबहाँ, कहती है ।
देख तु,
एक मुसाफिर हे ।
ज़िन्दगी के सफर मे
वाह,
जीने का ये क्या ?
मस्त बहाना है।
हाँ, सच तो ,है।
यही , यकीन दिलाते है।
लोग यहाँ, ...
इस दुनियाँ मे,
भरोसा ,रखिए खुद पर
जाने कब बदल जाऐ,
रास्ते ओर हमसफ़र ।