Rambriksh Bahadurpuri 28 Jul 2024 कविताएँ दुःखद #Rambriksh Bahadurpuri,#ambedkarnagar poetry #Dukh per kavita #mano hai sawan aaya 30431 0 Hindi :: हिंदी
मानों है सावन आया
आंखों से आंसू का झड़ना
मानों है सावन आया
दुःख के घेरे काले बादल
तन मन पर ऐसे छाया
नहीं उगेगा सुख का सूरज
नहीं सवेरा फिर होगा
आखिर दर्द भरा जीवन ही
ईश्वर! मैंने क्यों पाया?
जीवन का ही नाम हार है
जीत कौन जीवन पाया?
तेज आंधियाॅं या तुफान कब?
रोक कौन किसको पाया?
छट जायेगा दु:ख का बादल
सुखद सवेरा आयेगा
अटल सत्य है जीवन का यह
सुख से पहले दुःख आया।
संगम है दुःख सुख का जीवन
फिर कैसा है घबड़ाना?
दुःख आया है अगर आज तो
सुख का है निश्चित आना
समय-समय का फेरा है मन
इतना क्यों घबड़ाता तू?
धीरज रख लें मन में अपने
एक गया है एक आया।
रचनाकार
रामबृक्ष बहादुरपुरी
अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...